नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश बाढ़ के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। बचावकर्मी गहरे कीचड़ और मलबे में फँसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों की संख्या 675 तक पहुँच गई है, जबकि करीब 3,000 लोग अब भी लापता हैं।
बाढ़ ने कई गांवों, सड़कों, पुलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और मलबे के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बड़ी संख्या में परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
नेपाल की इस भयावह आपदा में प्रभावित लोगों के लिए राहत, बचाव और मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है।

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश बाढ़ में कम से कम 675 लोगों की मौत हो गई है। नेपाल पुलिस ने शनिवार, 29 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी। इससे पहले चीनी सरकारी मीडिया ने तिब्बत क्षेत्र में 7 लोगों की मौत की पुष्टि की थी।
नेपाल में बचाव एवं राहत अभियान के चौथे दिन करीब 3,000 फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 163 विदेशी नागरिक शामिल हैं। नेपाल सेना के जनसंपर्क निदेशालय के अनुसार अब तक 2,465 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 113 भारतीय, 26 चीनी, 15 दक्षिण कोरियाई, 4 जर्मन, इटली और अमेरिका के 2-2 तथा ओमान का 1 नागरिक शामिल है।
इसके अलावा, त्रिशूली और रसुवा क्षेत्रों में विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे 191 कर्मचारियों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले के अनुसार, इस विनाशकारी बाढ़ के बाद सीमा क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए नेपाल को लगभग 4 से 5 अरब डॉलर की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह प्रारंभिक अनुमान है और नुकसान का आकलन अभी जारी है।
शुक्रवार रात तक प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष (PMDRF) में 2.295 अरब नेपाली रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी थी। राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं।